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रायण वृक्ष के नीचे देवराज इंद्र द्वारा स्थापित प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के प्राचीन चरण पादुका जी हैं। यहाँ तीसरा चैत्यवंदन होता है। चैत्यवंदन पाठ:
तीन बार खमासमण सूत्र बोलकर झुककर प्रणाम करें। चैत्यवंदन सूत्र:
भव सायर थी तारि ने, शिवपुर ना सुख आपता। 2 ॥ भावार्थ: palitana 5 chaityavandan in hindi full
जैन धर्म में शत्रुंजय महातीर्थ (पालिताना) की यात्रा का अत्यंत विशेष महत्व है। इसे तीर्थों का राजा कहा जाता है। पालिताना की भावपूर्ण यात्रा पूर्ण करने और वहां की पवित्र ऊर्जा को आत्मसात करने के लिए की विधि की जाती है। यदि आप पालिताना जा रहे हैं या घर बैठे इस महातीर्थ की भाव यात्रा करना चाहते हैं, तो यहाँ पालिताना के ५ मुख्य चैत्यवंदन का संपूर्ण पाठ और विधि हिंदी में दी गई है।
बोलकर 'तस्स उत्तरी' सूत्र कहें और १ लोगस्स (या ४ नवकार मंत्र) का काउस्सग्ग (ध्यान) करें। palitana 5 chaityavandan in hindi full
भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर श्री पुंडरीक स्वामी थे। उन्होंने ५ करोड़ मुनियों के साथ इसी चैत्र सुद पूर्णिमा (चैत्री पूनम) के दिन पालिताना गिरिराज से मोक्ष प्राप्त किया था। उन्हीं के नाम पर इस पर्वत का नाम 'पुंडरीक गिरि' भी है।
पाठ के बाद शांतिनाथ भगवान का स्तवन, काउस्सग्ग और स्तुति की जाती है। palitana 5 chaityavandan in hindi full
पालीताना में चौथा चैत्यवंदन स्वयं पहाड़ी तथा वहाँ के सिद्ध क्षेत्र को नमन है।